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भर (राजभर) जनजाति : उत्तर भारत की प्राचीन और शक्तिशाली सभ्यता


The Bhar Tribe

भारत की प्राचीन जनजातीय सभ्यताओं में भर (राजभर) जनजाति का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। ऐतिहासिक अभिलेखों और ब्रिटिशकालीन राजस्व रिपोर्टों के अनुसार यह जनजाति कभी उत्तर और मध्य भारत के विशाल भू-भाग पर प्रभावशाली रूप से शासन करती थी। भरों को विभिन्न नामों से जाना जाता रहा है, जैसे राजभर, भरत, भरपटवा और भर।


भौगोलिक विस्तार और राजनीतिक शक्ति

इतिहास के अनुसार भर जनजाति का निवास क्षेत्र गोरखपुर (उत्तर भारत) से लेकर सागर (मध्य भारत) तक फैला हुआ था। अवध क्षेत्र में इनकी विशेष राजनीतिक शक्ति थी। बनारस और इलाहाबाद के बीच गंगा नदी के दोनों किनारों पर लगभग सत्तर मील लंबा क्षेत्र लगभग पूर्णतः भरों के अधिकार में था।

इतना ही नहीं, इलाहाबाद जिला भी प्रारंभिक काल में भरों के नियंत्रण में था। आज भी गंगा और यमुना के पार स्थित अनेक परगनों में इनके अस्तित्व के प्रमाण मिलते हैं।


किले, तालाब और स्थापत्य कौशल

भर जनजाति को उनकी निर्माण क्षमता और तकनीकी दक्षता के लिए जाना जाता था। उनके द्वारा निर्मित किले, जिन्हें स्थानीय भाषा में “भर-डीह” कहा जाता है, बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। इनमें से कई किले अत्यंत विशाल और मजबूत हैं।

ऐतिहासिक मान्यता है कि वर्तमान समय में दिखाई देने वाले अनेक गहरे तालाबों का निर्माण भी भरों द्वारा ही कराया गया था। खैरागढ़ परगना इनके श्रम, संगठन और इंजीनियरिंग क्षमता का प्रमुख उदाहरण है। खैरागढ़ का विशाल पत्थर का किला भी भरों की स्थापत्य शक्ति का प्रमाण माना जाता है।


बांदा, लुकवा और पहाड़ी किले

बांदा जिले के पूर्वी भाग में स्थित विशाल पहाड़ी किलों को भी भरों से जोड़ा जाता है। ब्रिटिश अधिकारी और इतिहासकार डॉ. विल्टन ओल्डहैम, जो उस समय बांदा के सहायक मजिस्ट्रेट थे, ने इन किलों को आकार में अत्यंत विशाल (Cyclopean) बताया और इनका श्रेय भर जनजाति को दिया।

विशेष रूप से उन्होंने चितौ परगने के लुकवा क्षेत्र का उल्लेख किया है।


अनेक जिलों में फैले ऐतिहासिक अवशेष

भर जनजाति के अवशेष आज भी मिर्जापुर, जौनपुर, आज़मगढ़, गाज़ीपुर, गोरखपुर तथा पूरे अवध प्रांत में देखे जा सकते हैं। इन क्षेत्रों में आज भी बंध, तालाब, भूमिगत गुफाएँ और पत्थर के किले मौजूद हैं, जो भरों की ऊर्जा, परिश्रम और कुशलता की साक्षी हैं।


रामकालीन परंपरा और सांस्कृतिक स्मृति

आज़मगढ़ क्षेत्र के निवासियों में यह परंपरा प्रचलित है कि भगवान राम के समय, जब यह क्षेत्र अयोध्या राज्य से जुड़ा हुआ था, तब यहाँ राजभर और असुर समुदायों का निवास था।

भरों द्वारा निर्मित बड़े-बड़े मिट्टी के किले आज भी इस प्राचीन इतिहास की मौन गवाही देते हैं।


निष्कर्ष

भर (राजभर) जनजाति केवल एक जनजाति नहीं थी, बल्कि वह उत्तर भारत की एक संगठित, शक्तिशाली और उन्नत सभ्यता थी। उनके द्वारा बनाए गए किले, जल संरचनाएँ और बस्तियाँ यह सिद्ध करती हैं कि वे प्रशासन, रक्षा और निर्माण कला में अत्यंत निपुण थे।

आज आवश्यकता है कि भर जनजाति के इतिहास को राजनीति से अलग रखकर, तथ्य और प्रमाण के आधार पर समझा और स्वीकार किया जाए, ताकि भारत के प्राचीन समाज की सच्ची तस्वीर सामने आ सके।


(संदर्भ: राजस्व बंदोबस्त रिपोर्ट, इलाहाबाद)

The Bhar Tribe


FAQ

प्रश्न 1: भर (राजभर) जनजाति कौन थी?

उत्तर: भर (राजभर) जनजाति उत्तर भारत की एक प्राचीन और शक्तिशाली जनजाति थी, जिसका शासन गोरखपुर से लेकर सागर (मध्य भारत) तक फैले बड़े भू-भाग पर रहा है। इन्हें राजभर, भरत और भरपटवा जैसे नामों से भी जाना जाता था।

प्रश्न 2: भर जनजाति का मुख्य क्षेत्र कौन-सा था?

उत्तर: भर जनजाति का मुख्य प्रभाव क्षेत्र अवध, इलाहाबाद, बनारस, आजमगढ़, गाजीपुर, जौनपुर, मिर्जापुर और गोरखपुर रहा है।

प्रश्न 3: “भर-डीह” क्या होता है?

उत्तर: “भर-डीह” भर जनजाति द्वारा निर्मित किलों को कहा जाता है। ये किले मिट्टी या पत्थर से बने होते थे और रक्षा की दृष्टि से अत्यंत मजबूत होते थे।

प्रश्न 4: क्या भर जनजाति ने तालाब और जल संरचनाएँ बनवाई थीं?

उत्तर: हाँ, ऐतिहासिक अभिलेखों के अनुसार भर जनजाति को अनेक गहरे तालाबों, बंधों और जल संरचनाओं के निर्माण का श्रेय दिया जाता है, जो आज भी कई जिलों में मौजूद हैं।

प्रश्न 5: खैरागढ़ किले का संबंध किससे है?

उत्तर: खैरागढ़ का विशाल पत्थर का किला भर जनजाति द्वारा निर्मित माना जाता है और यह उनके स्थापत्य और संगठन शक्ति का महत्वपूर्ण प्रमाण है।

प्रश्न 6: क्या भर जनजाति का उल्लेख ब्रिटिश रिकॉर्ड में मिलता है?

उत्तर: हाँ, ब्रिटिशकालीन राजस्व बंदोबस्त रिपोर्टों और अधिकारियों के विवरणों में भर जनजाति के किलों, क्षेत्रों और निर्माण कार्यों का स्पष्ट उल्लेख मिलता है।

प्रश्न 7: बांदा जिले के पहाड़ी किले किसने बनाए थे?

उत्तर: ब्रिटिश अधिकारी डॉ. विल्टन ओल्डहैम के अनुसार बांदा जिले के पूर्वी भाग में स्थित विशाल पहाड़ी किले भर जनजाति द्वारा बनाए गए थे।

प्रश्न 8: क्या भर जनजाति का संबंध रामकाल से जोड़ा जाता है?

उत्तर: आजमगढ़ क्षेत्र की लोक-परंपराओं के अनुसार रामकाल में यह क्षेत्र अयोध्या राज्य से जुड़ा था और यहाँ राजभर तथा असुर समुदाय का निवास माना जाता है।

प्रश्न 9: भर जनजाति के अवशेष आज कहाँ देखे जा सकते हैं?

उत्तर: आज भी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में मिट्टी के किले, पत्थर के दुर्ग, तालाब और भूमिगत संरचनाएँ भर जनजाति की उपस्थिति के प्रमाण के रूप में देखी जा सकती हैं।

प्रश्न 10: भर (राजभर) इतिहास को जानना क्यों आवश्यक है?

उत्तर: भर जनजाति का इतिहास जानना भारत की प्राचीन सामाजिक संरचना, जनजातीय शासन और स्थापत्य विकास को समझने के लिए आवश्यक है, जिससे इतिहास की सही और संतुलित तस्वीर सामने आती है।

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