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महाराजा सुहेलदेव राजभर की 1017वीं जयंती पूरे देश में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई

 

Maharaja Suheldev Rajbhar Jayanti

लखनऊ/वाराणसी/मऊ/बलिया।

आज महाराजा सुहेलदेव राजभर की 1017वीं जयंती उत्तर प्रदेश सहित देश के कई हिस्सों में श्रद्धा, सम्मान और सांस्कृतिक उत्साह के साथ मनाई गई। विभिन्न जिलों में आयोजित कार्यक्रमों में समाज के लोगों, सामाजिक संगठनों और राजनीतिक प्रतिनिधियों ने भाग लेकर वीर योद्धा महाराजा सुहेलदेव के योगदान को याद किया।

राजधानी लखनऊ में जयंती समारोह का विशेष आयोजन किया गया। लालबाग सहित अन्य स्थानों पर महाराजा सुहेलदेव की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी गई। कार्यक्रमों में वक्ताओं ने उन्हें राष्ट्रवीर बताते हुए विदेशी आक्रांताओं के विरुद्ध उनके संघर्ष और बलिदान को स्मरण किया।

वाराणसी और सारनाथ क्षेत्र में भी जयंती के अवसर पर पदयात्रा, माल्यार्पण और जनसभा का आयोजन हुआ। राजभर समाज के लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। इस दौरान महाराजा सुहेलदेव को सामाजिक एकता और स्वाभिमान का प्रतीक बताया गया।

मऊ और बलिया जिलों में जयंती समारोह पारंपरिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ मनाया गया। कहीं संगोष्ठी तो कहीं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आयोजन हुआ, जिसमें युवाओं की भागीदारी उल्लेखनीय रही।

उत्तर प्रदेश के अलावा महाराष्ट्र के नागपुर में भी महाराजा सुहेलदेव राजभर की जयंती को लेकर कार्यक्रम आयोजित किए गए। वहीं पंजाब के लुधियाना में आगामी दिनों में जयंती समारोह मनाने की तैयारियां चल रही हैं।

जयंती कार्यक्रमों के दौरान वक्ताओं ने कहा कि महाराजा सुहेलदेव केवल एक योद्धा ही नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और स्वाभिमान के प्रतीक थे। उनके जीवन से नई पीढ़ी को साहस, एकता और राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा मिलती है।

कुल मिलाकर, महाराजा सुहेलदेव राजभर की जयंती इस वर्ष भी जन-जन के बीच उनके इतिहास और गौरव को याद करने का अवसर बनकर सामने 

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